आदम जाति का एक नायाब प्रजाति "आदमी" जो . अपने आप में एक अद्भुत और अदम्य साहस से भरा हुआ . उत्पत्ति से लेकर आज तक प्रकृति के हरेक प्रतिकूल परिस्थितियों से निरंतर संघर्ष करते हुए अपने आपको बखूबी संभालता आ रहा है और आने वाले समय में भी ऐसा होता रहेगा.
इस ब्रह्मांड के किसी भी जीव मे खुद की पहचान को अपने आनेवाले पीढ़ियों को देने के लिए कुछ भी नही सौपा है जितनी की हमारे पूर्वज ने हमारे लिए सौप रखा है. चाहे वो तकनीक हो या सुविधा
.
बचपन से सुनता आ रहा हूँ की इस धरती के मनुष्य से भी कोई अति विकसित मनुष्य का समुदाय इस ब्रह्मांड के किसी कोने में विराजमान है, पर शायद वो भी अति विकसित मानव समुदाय हम हैं क्योंकि विगत 5000 साल से जितनी भी अनोखी घटना घ टी है वो हमारे पूर्वज और इसी उपग्रह का मानव ने किया है, जिसे हम दैविक या फिर चमत्कार कह सकते है जो राम, कृष्णा,ईशा मशीह, पैगंबर मुहम्मद या फिर गुरुनानक साहब ने कर दिखाया है.
हाँ एक बात है की हम इन विषम क्षणों में कमजोर भी पड़े थे लेकिन वो पल भी कुछ सीखा कर हमसे विदा लिए. मानव समुदाय हर प्रकार आदमियों से भरा है जिसे किसी एक की वजह से दोषी करार नही दे सकते है.क्योकि विराट प्रकृति भी हरेक को पनाह दिए हुए हैं जो मानव के लिए हितकर नही है फिर भी प्रकृति को कही न कही वो मानव विरोधी तत्व भी प्रकृति को उसकी शोभा बढ़ा ता है.
तो फिर मानव समुदाय को कुछ की वजह से अपेक्षित होने की ज़रूरत नही है.
लेकिन एक बात है, कि हमारी उत्पत्ति से लेकर अबतक जो संस्कार और साहस हमारे पूर्वजों [राम, कृष्णा,ईशा मशीह, पैगंबर मुहम्मद या फिर गुरुनानक साहब ] हमें धरोहर के रूप में सौपा है उसे और विकसित रूप में अपने आने वाले पीढ़ी को सौपने में सक्षम हो जो हमारी सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी होगी.
इस ब्रह्मांड के किसी भी जीव मे खुद की पहचान को अपने आनेवाले पीढ़ियों को देने के लिए कुछ भी नही सौपा है जितनी की हमारे पूर्वज ने हमारे लिए सौप रखा है. चाहे वो तकनीक हो या सुविधा
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बचपन से सुनता आ रहा हूँ की इस धरती के मनुष्य से भी कोई अति विकसित मनुष्य का समुदाय इस ब्रह्मांड के किसी कोने में विराजमान है, पर शायद वो भी अति विकसित मानव समुदाय हम हैं क्योंकि विगत 5000 साल से जितनी भी अनोखी घटना घ टी है वो हमारे पूर्वज और इसी उपग्रह का मानव ने किया है, जिसे हम दैविक या फिर चमत्कार कह सकते है जो राम, कृष्णा,ईशा मशीह, पैगंबर मुहम्मद या फिर गुरुनानक साहब ने कर दिखाया है.
हाँ एक बात है की हम इन विषम क्षणों में कमजोर भी पड़े थे लेकिन वो पल भी कुछ सीखा कर हमसे विदा लिए. मानव समुदाय हर प्रकार आदमियों से भरा है जिसे किसी एक की वजह से दोषी करार नही दे सकते है.क्योकि विराट प्रकृति भी हरेक को पनाह दिए हुए हैं जो मानव के लिए हितकर नही है फिर भी प्रकृति को कही न कही वो मानव विरोधी तत्व भी प्रकृति को उसकी शोभा बढ़ा ता है.
तो फिर मानव समुदाय को कुछ की वजह से अपेक्षित होने की ज़रूरत नही है.
लेकिन एक बात है, कि हमारी उत्पत्ति से लेकर अबतक जो संस्कार और साहस हमारे पूर्वजों [राम, कृष्णा,ईशा मशीह, पैगंबर मुहम्मद या फिर गुरुनानक साहब ] हमें धरोहर के रूप में सौपा है उसे और विकसित रूप में अपने आने वाले पीढ़ी को सौपने में सक्षम हो जो हमारी सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी होगी.


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